Sidhi News: सीधी के टमसार में तीन दिवसीय नगारा उत्सव का हुआ समापन

बिखरे लोक संस्कृति के रंग, रंगारंग प्रस्तुतियों और दिग्गजों की मौजूदगी में हुआ आयोजन

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सीधी। मध्य प्रदेश शासन के संस्कृति विभाग और जिला प्रशासन सीधी के संयुक्त तत्वावधान में टमसार में आयोजित तीन दिवसीय 'नगारा उत्सव' का शानदार समापन हुआ। लोककला, जनजातीय संस्कृति और सांस्कृतिक विविधता से सजे इस महोत्सव के अंतिम दिन देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक नृत्य शैलियों ने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से भारतीय लोक परंपराओं और संस्कृति की विविधता को जीवंत कर दिया।

 

भव्य समापन समारोह में सांसद राजेश मिश्रा, धोहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम, जिला पंचायत सदस्य हीराबाई सिंह, पुलिस अधीक्षक संतोष कोरी, एसडीएम सागर जैन, सहायक आयुक्त जनजातीय कार्य विभाग केके पांडेय तथा जनपद पंचायत सीईओ ज्ञानेंद्र मिश्रा सहित तमाम गणमान्य अधिकारी और जनप्रतिनिधि उपस्थित रहे। अतिथियों ने कलाकारों का उत्साहवर्धन करते हुए लोक संस्कृति के संरक्षण में ऐसे आयोजनों को बेहद महत्वपूर्ण बताया।

 

सात लोक नृत्यों का जलवा

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उत्सव के आखिरी दिन मंच पर लोक कलाओं का महासंगम देखने को मिला। मध्य प्रदेश के पारंपरिक भड़म, तालकटहरी और गुदुमबाजा नृत्यों ने समां बांधा। इसके साथ ही झारखंड के उरांव, महाराष्ट्र के लेजिम, केरल के चेंडा मेलम और ओडिशा के दुलदुल घोड़ी नृत्य ने सांस्कृतिक प्रस्तुतियों में विविधता के अनूठे रंग बिखेरे।

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लोक संस्कृति ही असली पहचान: सांसद
सांसद राजेश मिश्रा ने कहा कि भारत की सांस्कृतिक विविधता ही उसकी विशिष्ट पहचान है। लोकगीत, लोकनृत्य और जनजातीय परंपराएं हमारी समृद्ध विरासत का अहम हिस्सा हैं। ऐसे आयोजनों से क्षेत्रीय लोककलाओं को बड़ा मंच मिलता है और युवा पीढ़ी अपनी सांस्कृतिक जड़ों से जुड़ती है। उन्होंने कलाकारों की सराहना करते हुए कहा कि वे पारंपरिक मूल्यों को जीवित रखे हुए हैं।


कला और परंपरा को बढ़ावा: विधायक
धोहनी विधायक कुंवर सिंह टेकाम ने कहा कि पारंपरिक नृत्य, लोकगीत और वाद्ययंत्र हमारी संस्कृति को समृद्ध बनाते हैं। ऐसे आयोजन ग्रामीण और जनजातीय प्रतिभाओं को अपनी कला दुनिया के सामने रखने का बेहतरीन अवसर देते हैं, जिससे नई पीढ़ी में संस्कृति के प्रति सम्मान और जुड़ाव की भावना बढ़ती है।


विरासत को संजोने का संदेश

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तीन दिवसीय नगारा उत्सव ने टमसार में देश भर की लोक कलाओं को एक सूत्र में पिरोया। इस आयोजन का समापन इस सशक्त संदेश के साथ हुआ कि लोककलाओं का संरक्षण केवल पुरानी परंपराओं को सहेजना नहीं है, बल्कि आने वाली पीढ़ियों तक अपनी सांस्कृतिक पहचान को जीवंत बनाए रखना है।

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