Rewa News: रीवा में कक्षाओं को छोड़कर शिक्षक पहुंचे प्रदर्शन करने, सरकार के खिलाफ फूंका बिगुल
कार्यदिवस में नहीं ली विभागीय अनुमति, न ही अवकाश लिया; दूर-दराज के शिक्षकों ने भी कलेक्ट्रेट पहुंच टीईटी परीक्षा आदेश पर जताया विरोध
रीवा। विगत गुरुवार को 2 सैकड़ा से अधिक शिक्षकों ने अध्यापक संवर्ग के बैनर तले कलेक्ट्रेट कार्यालय पहुंचकर टीईटी परीक्षा को लेकर जारी आदेश के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया।
शिक्षकों ने मुख्यमंत्री के नाम कलेक्टर को ज्ञापन सौंपते हुए टीईटी आदेश को तत्काल निरस्त करने, सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर करने और पहली नियुक्ति तिथि से पेंशन, ग्रेच्युटी व अवकाश नगदीकरण का लाभ देने की मांग की है। शिक्षकों ने मांगें पूरी न होने पर प्रदेश स्तर पर उग्र आंदोलन की चेतावनी भी दी है।
वहीं लोगों में इस बात की चर्चा जोरों पर है कि अध्यापक संवर्ग द्वारा कक्षाएं छोड़कर प्रदर्शन करने की न तो विभागीय अनुमति ली गई थी और न ही प्रदर्शन के लिए किसी भी शिक्षक द्वारा कार्य दिवस में अवकाश ही लिया गया था।
चर्चा तो यह भी है कि प्रदर्शन में शामिल कई शिक्षकों की पदस्थापना जिला मुख्यालय से ७०-८० किलोमीटर दूर है। वे भी बगैर अवकाश लिए प्रदर्शन में शामिल रहे। जबकि इन दिनों सभी विद्यालयों में शासन के निर्देशानुसार नियमित रूप से कक्षाओं का संचालन हो रहा है। ऐसे में वैतनिक कार्यदिवस के दिन, बगैर अनुमति शिक्षकों द्वारा कक्षाओं को दरकिनार करते हुए तमाम नौनिहालों के भविष्य के साथ खिलवाड़ करना और शासन की मंशा टीईटी परीक्षा का विरोध करना सिस्टम पर ही कई सवाल खड़े कर रहा है।
पुनर्विचार याचिका दायर करने की मांग
वहीं प्रदर्शन के दौरान कई शिक्षकों ने बताया कि टीईटी परीक्षा से जुड़ा हालिया आदेश उनके हितों के विपरीत है, जिससे बड़ी संख्या में शिक्षक प्रभावित हो रहे हैं। इस आदेश को वापस लेना सरकार की जिम्मेदारी है। शिक्षकों ने मांग उठाई कि इस पूरे मामले में सुप्रीम कोर्ट में पुनर्विचार याचिका दायर की जाए, ताकि अध्यापक संवर्ग के हितों की रक्षा सुनिश्चित हो सके।
संघ पदाधिकारी बोले- समाधान नहीं, तो करेंगे बड़ा आंदोलन
प्रदर्शन में शामिल संयुक्त मोर्चा शिक्षक संघ के पदाधिकारी शिवानंद तिवारी ने कहा कि, टीईटी से जुड़ा आदेश पूरी तरह से शिक्षकों के हितों के खिलाफ है। सरकार को जमीनी हकीकत समझते हुए इसे तत्काल वापस लेना चाहिए।
लंबे समय से अध्यापक संवर्ग अपनी मांगों को लेकर संघर्ष कर रहा है, लेकिन अब तक कोई ठोस निर्णय नहीं लिया गया है। अगर सरकार ने जल्द समाधान नहीं निकाला, तो प्रदेश स्तर पर बड़ा आंदोलन किया जाएगा।