Railway News: रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव बोले- किफायती दरों पर यात्रा के साथ गरीबों की सेवा के लिए सरकार निरंतर प्रतिबद्ध

अधिक नॉन-एसी कोच के साथ भारतीय रेलवे आम नागरिकों की जरूरतों को दे रही प्राथमिकता 

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Indian Railways

नई दिल्ली। लगभग 1,37,000 किलोमीटर के रेल मार्ग और 25,500 से अधिक ट्रेनों के विशाल नेटवर्क के साथ, भारतीय रेलवे देश के एक कोने से दूसरे कोने तक यात्रियों के आवागमन और माल ढुलाई को सुगम बनाकर लोगों को रोजगार से जोड़ने और अर्थव्यवस्था के निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रही है। भारत सरकार देश में भारी सब्सिडी वाली रेल यात्रा प्रदान कर रही है, सरकार प्रत्येक यात्री टिकट की लागत का 45 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन करती है, जिससे आधुनिक यात्रा अनुभव सुनिश्चित होने के बावजूद यहाँ का किराया पड़ोसी देशों और विकसित देशों की तुलना में काफी कम है।


कम दूरी की यात्रा को सुगम बनाने के लिए 200 नई इंटरसिटी ट्रेनें और मुंबई हेतु स्वचालित दरवाजों वाली 238 नई उपनगरीय ट्रेनें जल्द शुरू की जाएंगी। पिछले 10 वर्षों में 5 लाख नौकरियों और बीते 2 वर्षों में 1.43 लाख सीधी नियुक्तियों के अलावा, रेलवे की विभिन्न परियोजनाएं लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी सृजित कर रही हैं। स्टेशन पर बेहतर सुविधाएं और तकनीक-आधारित रखरखाव पद्धतियां भारत में यात्रा के अनुभव को नया आयाम दे रही हैं।


भारतीय रेलवे वर्तमान में अभूतपूर्व विस्तार और आधुनिकीकरण के दौर से गुजर रही है, जिसे केंद्रीय बजट 2026-27 में 2.78 लाख करोड़ के रिकॉर्ड बजटीय आवंटन से सशक्त बनाया गया है। रेल मंत्रालय की अनुदान मांगों (2026-27) पर संसद में हुई चर्चा का जवाब देते हुए, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने आज रेखांकित किया कि रेलवे में एक प्रमुख संरचनात्मक सुधार रेल बजट का आम बजट में विलय था, जिसके परिणामस्वरूप तीन प्रमुख लाभ हुए हैं। उन्होंने भारतीय रेल के वर्तमान रूपांतरण को 'धीमी प्रगतिÓ से 'सुपर-फास्ट ट्रांसफॉर्मेशन' की ओर एक बड़े बदलाव के रूप में वर्णित किया, जो इस राष्ट्रीय परिवहन सेवा के लिए एक नए युग की शुरुआत का प्रतीक है।


सबसे पहले, इसने बजटीय सहायता में व्यापक वृद्धि का मार्ग प्रशस्त किया है, जो पहले के लगभग 25,000-30,000 करोड़ से बढ़कर वर्तमान वित्तीय वर्ष में लगभग 2.78 लाख करोड़ हो गई है। दूसरा, इसने वर्ष भर निरंतर निर्णय लेने और आवश्यक स्वीकृतियां प्राप्त करने की प्रक्रिया को सुगम बनाया है, जिसमें परियोजनाओं की मंजूरी, नई सेवाओं की शुरुआत और आधुनिक तकनीक को अपनाना शामिल है। तीसरा, इससे प्रणाली में बेहतर पारदर्शिता और संस्थागत निगरानी आई है, जहाँ अब परियोजनाओं की समीक्षा वित्त मंत्रालय और नीति आयोग से जुड़ी प्रणालियों के माध्यम से की जा रही है।


ऐतिहासिक बजटीय आवंटन और रेलवे की मजबूत वित्तीय स्थिति
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि केंद्रीय बजट 2026-27 में भारतीय रेलवे के लिए रिकॉर्ड आवंटन किया गया है, जो देश भर के सभी राज्यों को लाभान्वित कर रहा है और बुनियादी ढांचे के त्वरित विकास को गति दे रहा है।

श्री वैष्णव ने स्पष्ट किया कि रेलवे के प्रमुख व्यय मदों में लगभग 1.19 लाख करोड़ का कार्मिक व्यय, करीब 64,000 करोड़ का पेंशन व्यय, लगभग 32,000 करोड़ की ऊर्जा लागत और लगभग 23,000 करोड़ की वित्त लागत शामिल है। इन भारी खर्चों के बावजूद, रेलवे निरंतर सकारात्मक संतुलन बनाए हुए है।

उन्होंने आगे उल्लेख किया कि रेल विद्युतीकरण के परिणामस्वरूप लगभग 6,000 करोड़ की बचत हुई है और विद्युतीकरण के बढ़ते दायरे के कारण डीजल की खपत में भी निरंतर गिरावट आ रही है।


इन्फ्रास्ट्रक्चर का विस्तार और क्षमता में वृद्धि
श्री वैष्णव ने पिछले एक दशक में रेलवे इन्फ्रास्ट्रक्चर में हुए महत्वपूर्ण विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि माल ढुलाई 2013-14 के लगभग 1,055 मिलियन टन से बढ़कर अब लगभग 1,650 मिलियन टन हो गई है, जिससे भारतीय रेलवे वैश्विक स्तर पर दूसरा सबसे बड़ा माल वाहक बन गया है।

रेलवे ट्रैक निर्माण की गति में व्यापक तेजी आई है, जिसके तहत लगभग 35,000 किलोमीटर नई पटरियां बिछाई गई हैं, जबकि इससे पिछली अवधि में यह आंकड़ा लगभग 15,000 किलोमीटर था। विद्युतीकरण के क्षेत्र में भी तीव्र प्रगति देखी गई है, जो लगभग 5,200 किलोमीटर से बढ़कर करीब 47,000 किलोमीटर तक पहुँच गई है। इसके साथ ही भारतीय रेलवे ने 99 प्रतिशत से अधिक नेटवर्क विद्युतीकरण का लक्ष्य हासिल कर लिया है।


सुरक्षा इंफ्रास्ट्रक्चर के संदर्भ में, रोड ओवर ब्रिज (आरओबी) और रोड अंडर ब्रिज (आरयूबी) की संख्या लगभग 4,000 से बढ़कर करीब 14,000 हो गई है। इसी तरह, ऑटोमैटिक सिग्नलिंग (स्वचालित सिग्नल प्रणाली) का विस्तार भी लगभग 1,500 किलोमीटर से बढ़कर 4,000 किलोमीटर से अधिक हो गया है।


केंद्रीय मंत्री ने यह भी बताया कि एलएचबी कोचों की संख्या में, जो कि अधिक सुरक्षित और आधुनिक हैं, उल्लेखनीय वृद्धि हुई है और हाल के वर्षों में लगभग 48,000 ऐसे कोच जोड़े गए हैं। इसके साथ ही, लोकोमोटिव का उत्पादन बढ़कर लगभग 12,000 यूनिट हो गया है, जबकि वैगन की संख्या 2 लाख यूनिट के आंकड़े को पार कर गई है।


सुरक्षा व्यवस्था में सुधार
श्री वैष्णव ने इस बात पर जोर दिया कि सुरक्षा रेलवे की सर्वोच्च प्राथमिकता बनी हुई है। इसके लिए ट्रैक रखरखाव, रोलिंग स्टॉक के रखरखाव, अत्याधुनिक तकनीक को अपनाने और प्रशिक्षण पद्धतियों पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है।


उन्होंने बताया कि रेलवे दुर्घटनाओं में लगभग 90 प्रतिशत की कमी आई है, जिसे 'रूट कॉज़ एनालिसिस' (व्यवस्थित मूल कारण का विश्लेषण) और सुधारात्मक उपायों के माध्यम से संभव बनाया गया है। सुरक्षा में निवेश भी उल्लेखनीय रूप से बढ़ा है, जिसके तहत सुरक्षा संबंधी कार्यों के लिए लगभग 1.2 लाख करोड़ आवंटित किए गए हैं।


सुरक्षा तकनीक पर चर्चा करते हुए, उन्होंने स्वदेशी रूप से विकसित स्वचालित ट्रेन सुरक्षा प्रणाली 'कवच' की प्रगति पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि लगभग 3,000 किलोमीटर के नेटवर्क को पहले ही इसके दायरे में लाया जा चुका है, जबकि करीब 20,000 किलोमीटर पर कार्य प्रगति पर है और लगभग 8,000 रेल इंजनों में इसे लगाने की योजना है।


उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि 'कवच' एक व्यापक सुरक्षा प्रणाली है, जिसमें ऑप्टिकल फाइबर नेटवर्क, टेलीकॉम टावर, डेटा सेंटर और ऑनबोर्ड उपकरण शामिल हैं। इसकी जटिलता एक पूर्ण टेलीकॉम इंफ्रास्ट्रक्चर के समान है।


यात्री सेवाएं और सस्ती यात्रा की सुविधा
श्री वैष्णव ने कहा कि रेलवे आम नागरिकों के लिए किफायती यात्रा को प्राथमिकता देना जारी रखे हुए है। लगभग 70 प्रतिशत कोच जनरल और स्लीपर श्रेणी के हैं, जो अधिकांश यात्रियों के लिए सुलभता सुनिश्चित करते हैं। उन्होंने सूचित किया कि अतिरिक्त जनरल कोच (सामान्य श्रेणी के डिब्बे) शुरू किए गए हैं, जिनमें वर्ष 2024-25 में लगभग 1,250 कोच और 2025-26 में करीब 860 कोच शामिल हैं।


उन्होंने जानकारी दी कि रेलवे वर्तमान में प्रतिवर्ष लगभग 60,000 करोड़ की यात्री सब्सिडी प्रदान कर रही है, जो प्रति यात्री औसतन लगभग 45 प्रतिशत की छूट के बराबर है। इसके अतिरिक्त, मुंबई जैसे उपनगरीय (सबअर्बन) इलाकों में लगभग 3,000 करोड़ की अतिरिक्त सब्सिडी प्रदान की जा रही है।


नई रेल सेवाओं की शुरुआत
केंद्रीय मंत्री ने आधुनिक रेल सेवाओं की शुरुआत और उनके विस्तार पर प्रकाश डाला। उन्होंने बताया कि वर्तमान में 160 से अधिक वंदे भारत सेवाएं संचालित हैं, साथ ही किफायती लंबी दूरी की यात्रा की सुविधा प्रदान करने वाली 60 अमृत भारत ट्रेन सेवाएं भी अपनी सेवाएं दे रही हैं। 


उन्होंने यह भी सूचित किया कि 133 अमृत भारत ट्रेनों का मैन्युफैक्चरिंग कार्य प्रगति पर है। इसके अतिरिक्त, वंदे भारत स्लीपर ट्रेनें भी शुरू की गई हैं और उनके प्रदर्शन को लेकर सकारात्मक फीडबैक प्राप्त हुआ है।


उन्होंने यह भी बताया कि रेलवे मुंबई के लिए ऑटोमैटिक डोर-क्लोजिंग सिस्टम (स्वचालित द्वार बंद होने की प्रणाली) वाली 238 नई उपनगरीय (सबअर्बन) ट्रेनों और कम दूरी की यात्रा के लिए लगभग 200 नई मेमू ट्रेनों के उत्पादन का कार्य कर रही है, जिन्हें 'इंटरसिटी' के नाम से जाना जाएगा।


विशेष रेलगाड़ियाँ और यात्रियों की सुलभता
श्री वैष्णव ने बताया कि पीक सीजन की मांग को पूरा करने के लिए विशेष ट्रेनों के संचालन का व्यापक विस्तार किया गया है। जहाँ पहले प्रतिवर्ष लगभग 2,000-2,500 विशेष ट्रेनें चलाई जाती थीं, वहीं इस बार लोगों की सुविधा के लिए रिकॉर्ड संख्या में विशेष ट्रेनों का संचालन किया जा रहा है।


दिवाली और छठ जैसे प्रमुख त्योहारों के दौरान लगभग 12,383 विशेष ट्रेनें संचालित की गईं, जबकि होली के दौरान अब तक 1,500 से अधिक ट्रेनें चलाई जा चुकी हैं। उन्होंने आगे बताया कि 75 प्रमुख स्टेशनों पर होल्डिंग एरिया (प्रतीक्षा क्षेत्र) विकसित किए जा रहे हैं और यात्रियों की सुविधा बढ़ाने के लिए 1,200 से अधिक नई ईएमयू/मेमू सेवाएं शुरू की गई हैं।


रेलवे में रोजगार के अवसर और पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया
रोजगार के विषय पर श्री वैष्णव ने बताया कि पिछले एक दशक में रेलवे में लगभग 5 लाख नौकरियां प्रदान की गई हैं, जबकि 1.43 लाख भर्तियों की प्रक्रिया वर्तमान में जारी है।
उन्होंने एक व्यवस्थित वार्षिक भर्ती कैलेंडर की शुरुआत पर प्रकाश डाला, जो पूर्वानुमान और पारदर्शिता सुनिश्चित करता है। रेलवे की भर्ती परीक्षाएं 15 भाषाओं में और 150 शहरों में आयोजित की जा रही हैं, जिनमें लगभग 3.6 करोड़ उम्मीदवारों की भागीदारी देखी गई है।


उन्होंने यह भी सूचित किया कि शिकायतों के त्वरित निवारण और परीक्षाओं का सुचारु संचालन सुनिश्चित करने के लिए एक केंद्रीय निगरानी प्रणाली (वार रूम) स्थापित की गई है।


प्रमुख उपलब्धियाँ:

  1. 300 किमी से अधिक वायाडक्ट निर्माण का कार्य पूर्ण।
  2. पिलर निर्माण, ट्रैक बिछाने और स्टेशनों के विकास में उल्लेखनीय प्रगति।
  3. कई नदियों पर पुलों का निर्माण कार्य संपन्न।
  4. भारत की पहली समुद्र के नीचे की रेल सुरंग पर कार्य जारी, जिसमें महत्वपूर्ण प्रगति हासिल की गई है। 

उन्होंने बताया कि इस परियोजना को 2027 से चरणों में शुरू करने का लक्ष्य रखा गया है, जिसमें ट्रेनों के 350 किमी/घंटा तक की गति से चलने की उम्मीद है। इससे मुंबई और अहमदाबाद के बीच यात्रा का समय घटकर 2 घंटे से भी कम हो जाएगा। मंत्री ने यह भी सूचित किया कि सात अतिरिक्त हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर की घोषणा की गई है, जो भविष्य में भारत के हाई-स्पीड नेटवर्क को लगभग 4,000 किलोमीटर तक विस्तारित करेंगे।