Satna News: सतना में इस बार रहेगा टक्कर का मुकाबला, 4 माह बाद फिर आमने-सामने होंगे सिद्वार्थ कुशवाहा-गणेश सिंह

हाल ही में सिद्धार्थ ने गणेश सिंह को हराया है विधानसभा का चुनाव, लेकिन इस बार 7 विधानसभा साधने होंगे

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कांग्रेस ने मंगलवार को प्रत्याशियों की 43 नामों वाली दूसरी लिस्ट जारी की। सतना से विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा को प्रत्याशी बनाया गया है। जिसके बाद सतना से चुनावी मुकाबले की स्थिति साफ हो चुकी है। क्यों कि भाजपा सांसद गणेश सिंह के रूप में पहले ही अपना उम्मीदवार घोषित कर चुकी है। 

सतना में इस बार का मुकाबला काफी दिलचस्प होने की उम्मीद जताई जा रही है। क्यों कि 4 बार के सांसद गणेश सिंह के सामने ४ माह पहले उनको ही विधानसभा का चुनाव हरा चुके कांग्रेस के सिद्धार्थ कुशवाहा होंगे। दोनों ही दलों के प्रत्याशी ओबीसी वर्ग से आते हैं, साथ ही  अपने अपने जाति के प्रभावशाली नेता माने जाते हैं। जानकारों की माने तो सिद्धार्थ-गणेश के बीच का मुकाबला बसपा प्रत्याशी पर भी निर्भर करेगा। फिलहाल बसपा ने अपना कैंडिडेट सामने नहीं किया है। 

बता दें कि सिद्धार्थ कुशवाहा के पिता स्व. सुखलाल कुशवाहा बसपा से संासद रह चुके हैं। 2018 में सिद्धार्थ पहली बार कांग्रेस के टिकट पर विधायक चुने गए थे। जिसके बाद विधायक रहते हुए उन्हें पार्टी ने महापौर का टिकट दिया, हालांकि इस चुनाव में उन्हें पराजय का सामना करना पड़ा। सतना नगर निगम के महापौर का चुनाव वे भाजपा के योगेश ताम्रकार के मुकाबले लगभग 25 हजार वोटों के बड़े अंतर से चुनाव हार गए थे। जिसके बाद विधानसभा की टिकट पर भी संशय हो गया।

महापौरी हारे, विधायकी जीते 
उस समय यह कयास लगाए जाने लगे थे कि विधानसभा चुनाव में कांग्रेस चेहरा बदल सकती है, लेकिन इन अटकलों को खत्म करते हुए कांग्रेस ने 2023 में भी सिद्धार्थ पर विश्वास जताया। और 4 बार के सांसद गणेश सिंह के सामने उन्होंने अपना दमखम दिखाया। और बेहद प्रतिष्ठापूर्ण मुकाबले में सिद्धार्थ ने  जिले में भाजपा के सबसे बड़े चेहरे  गणेश सिंह को 4400 वोटों के अंतर से हराकर सीट पर कांग्रेस का कब्जा बरकरार रखा।  जिसके बाद अब एक बार फिर सिद्धार्थ सुखलाल कुशवाहा डब्बू और सांसद गणेश सिंह आमने - सामने होंगे।


अब कैसा रहेगा समीकरण 
हाल ही में गणेश सिंह को चुनाव हराने वाले सिद्धार्थ कुशवाहा को टिकट देकर कांग्रेस ने मुकाबला रोमांचक बना दिया है। जीत का मनोवैज्ञानिक फायदा सिद्धार्थ को मिलेगा। कांग्रेस का कार्यकर्ता भी यहां अपेक्षाकृत उत्साह से कार्य करेगा। हालांकि विधायक और सांसद के चुनाव में बहुत अंतर होता है। पहले की अपेक्षा इस बार सात विधानसभा क्षेत्रों को साधना होगा। इतना ही नहीं बीजेपी का मजूबत संगठन सिद्धार्थ के लिए बड़ी चुनाती रहने वाला है। और उससे भी बड़ी चुनौती नरेंद्र मोदी का चेहरा होगा। जिसके बलबूते यह चुनाव लड़ा जाने वाला है।