Rewa News: रीवा में संचालित क्रेशर प्लांट्स की 6 सदस्यीय टीम करेगी जांच, NGT न्यायालय को सौपेंगे रिपोर्ट

नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल न्यायालय में महीने भर के भीतर जांच रिपोर्ट की जाएगी पेश

 | 
satna

रीवा में मानकों को धता बताने वाले क्रेशर प्लांट्स की जांच की जाएगी। जिसके लिए ६ सदस्यीय टीम का गठन किया गया है।  वहीं इस टीम को एक महीने के भीतर जांच रिपोर्ट न्यायालय में पेश करना है। जिसके आदेश 28 फरवरी को जारी किए गए थे। जहां 13 दिनों का समय बीत चुका है। दरसल  नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल न्यायालय भोपाल में रीवा के अतुल जैन और एडवोकेट बीके माला ने याचिका दायर की थी।


मामले की सुनवाई करते हुए एनजीटी न्यायालय ने 28 फरवरी को आदेश पारित किया। जिसमें 6 सप्ताह के भीतर कमेटी बनाकर नियम विरुद्ध तरीके से संचालित क्रेशर पर कार्रवाई के निर्देश दिए गए। लेकिन १३ दिन का समय बीत जाने के बाद केवल टीम ही गठित हो सकी है। माना जा रहा है कि अब टीम जल्द से जल्द जांच प्रक्रिया शुरू करेगी। 

बताया जा रहा है कि जांच टीम में मध्यप्रदेश प्रदूषण बोर्ड, केंद्रीय प्रदूषण बोर्ड, सिया बोर्ड, रीवा कलेक्टर कार्यालय, खनिज विभाग के एक-एक सदस्य शामिल हैं। जांच कमेटी में कुल 6 सदस्य हैं। जो जांच के बाद जांच रिपोर्ट न्यायालय को सौपेंगे। शिकायतकर्ता और अधिवक्ता बीके माला ने बताया कि हमने याचिका दायर की थी। जिसकी सुनवाई करते हुए न्यायालय ने आदेश में कहा कि जांच संयुक्त कमेटी करेगी। उन्होंने आरोप लगाते हुए कहा कि रीवा के बनकुइया,हुजूर,बेला,भोलगढ़ समेत कई जगहों पर सैकड़ों की संख्या में क्रेशर प्लांट संचालित हैं। जिनमें से अधिकांश प्लांट गाइडलाइन को ताक पर रखकर मनमानी तरीके से चलाए जा रहे हैं। 


 जांच कमेटी क्रेशर के संचालन में नियमों, प्रावधानों और मानकों के पालन संबंधित पहलुओं की जांच करेगी। इसके अलावा अवैध रूप से क्षेत्र में कितने क्रेशर संचालित हो रहे हैं इसकी भी जांच होनी है। जांच में प्रदूषण को लेकर फोकस किया जाएगा।


 बता दें कि लंबे से समय से अमानक पैमानो पर चल रहे के्रशर प्लांट्स पर कभी ठोस कार्यवाही नहीं की गई।  आज तक जिला प्रशासन,प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड या फिर खनिज विभाग के द्वारा सही तरीके से जांच नहीं की गई है। पूरा इलाका प्रदूषण से ग्रसित है। जिसकी वजह से लोगों को सांस लेने में दिक्कत और दमा जैसी गंभीर बीमारियां भी हो रही हैं।