Satna News: कुपोषण से मासूम की मौत: जिम्मेदार कौन?
सिद्धार्थ कुशवाहा ने उठाए सवाल, पूर्व विधायक नीलांशु चतुर्वेदी की चुप्पी पर भी निशाना
6 महीने में 4 बच्चों की मौत से हड़कंप; सीएमएचओ ने 7 कर्मचारियों को नोटिस थमाया
सतना। चित्रकूट विधानसभा क्षेत्र में कुपोषण से एक मासूम बच्ची की मौत ने एक बार फिर सरकारी व्यवस्थाओं की पोल खोल दी है। मामले को लेकर सतना विधायक सिद्धार्थ कुशवाहा ने तीखी प्रतिक्रिया देते हुए पूछा है कि आखिर इन मौतों का जिम्मेदार कौन है?
उन्होंने कहा कि एक ओर चित्रकूट में उत्सवों और आयोजनों पर लाखों रुपए खर्च किए जा रहे हैं, वहीं दूसरी ओर गरीब परिवारों के बच्चे कुपोषण का शिकार होकर दम तोड़ रहे हैं। यह स्थिति न सिर्फ चिंताजनक है, बल्कि प्रशासनिक विफलता को भी उजागर करती है।
कुशवाहा ने पूर्व विधायक नीलांशु चतुर्वेदी पर भी निशाना साधते हुए कहा कि क्षेत्र में लगातार हो रही बच्चों की मौतों पर उनकी चुप्पी कई सवाल खड़े करती है। उन्होंने आरोप लगाया कि महत्वपूर्ण जन मुद्दों पर मौन रहना ही उनकी राजनीतिक हार का कारण बना।
मझगवां बना कुपोषण का केंद्र
सतना जिले का मझगवां विकासखंड लंबे समय से कुपोषण के मामलों को लेकर बदनाम रहा है। हालात इतने गंभीर हैं कि बीते 6 महीनों में कुपोषण से 4 बच्चों की मौत हो चुकी है, जबकि कई अन्य बच्चे अभी भी इस समस्या से जूझ रहे हैं।
योजनाएं कागजों तक सीमित
स्थानीय स्तर पर हालात यह हैं कि कई परिवार अपने बच्चों को पर्याप्त पोषण, दूध, दवाइयां तक उपलब्ध नहीं करा पा रहे हैं। इससे साफ जाहिर होता है कि सरकारी योजनाओं का लाभ जरूरतमंदों तक प्रभावी ढंग से नहीं पहुंच पा रहा है। साफ पेयजल और खाद्य सामग्री जैसी मूलभूत सुविधाएं भी कई जगहों पर नदारद हैं।
कार्रवाई और विशेष अभियान की मांग
विधायक ने मांग की है कि इस गंभीर समस्या पर तत्काल ध्यान देते हुए दोषी अधिकारियों पर सख्त कार्रवाई की जाए। साथ ही कुपोषित बच्चों के लिए 15 से 20 दिन का विशेष अभियान चलाकर उनकी निगरानी और प्रभावित परिवारों को हर संभव सहायता उपलब्ध कराई जाए।
चित्रकूट में बढ़ता कुपोषण न केवल वर्तमान बल्कि आने वाली पीढ़ी के स्वास्थ्य के लिए भी बड़ा खतरा बनता जा रहा है। अब देखना यह है कि प्रशासन इस पर कितनी गंभीरता से कदम उठाता है।
सीएमएचओ ने किया जवाब तलब
इस मामले में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. मनोज शुक्ला ने प्रथम दृष्टया लापरवाही पाए जाने पर सात कर्मचारियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
ज्ञात हो कि महिला एवं बाल विकास विभाग और स्वास्थ्य विभाग की संयुक्त रिपोर्ट में बच्चों की समय पर स्क्रीनिंग नहीं होने सहित कई गंभीर लापरवाहियां सामने आई हैं। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र नयागांव की आरबीएसके मेडिकल ऑफिसर डॉ. पूजा शुक्ला पर नियमित स्क्रीनिंग न करने और उच्च जोखिम वाले शिशुओं की पहचान में लापरवाही के आरोप हैं।
इसी मामले में आरबीएसके मेडिकल ऑफिसर डॉ. धनेश द्विवेदी, सेंट्रल मेडिकल ऑफिसर डॉ. धनेन्द्र पाण्डेय, ब्लॉक कम्युनिटी मोबिलाइजर देवमुनि पटेल, सेक्टर सुपरवाइजर कमलेश चंद्र सिंह, सीएचओ डॉ. पुष्पेंद्र गुप्ता और उप स्वास्थ्य केंद्र चौबेपुर की एएनएम विद्या चक्रवर्ती को भी नोटिस जारी किया गया है।