Shahdol News: 'अरिंदम संगीत एवं कला' संस्थान बच्चों को दे रहा संगीत और कला का प्रशिक्षण
मोबाइल युग में संगीत, आर्ट एवं क्राफ्ट शिक्षा का बढ़ता महत्व: बच्चों के मानसिक विकास में अहम भूमिका
शहडोल। आज के डिजिटल और मोबाइल-प्रधान युग में जहां बच्चों का अधिकतर समय स्क्रीन पर बीत रहा है, वहीं विशेषज्ञों का मानना है कि संगीत और कला बच्चों के समग्र विकास के लिए अत्यंत आवश्यक हो गई है। यह बच्चों की मानसिक स्थिति, ध्यान शक्ति (कंसंट्रेशन) और भावनात्मक संतुलन को भी बेहतर बनाता है।
शोध बताते हैं कि जो बच्चे कम उम्र से संगीत आर्ट एवं क्राफ्ट, सीखते हैं उनकी स्मरण शक्ति (मेमोरी), एकाग्रता और समस्या सुलझाने की क्षमता अन्य बच्चों की तुलना में अधिक विकसित होती है ,मस्तिष्क के दोनों हिस्सों को सक्रिय करता है, जिससे बच्चों की रचनात्मकता (क्रिएटिविटी) और सोचने की क्षमता में वृद्धि होती है। इसके साथ ही, संगीत तनाव को कम करने और भावनात्मक स्थिरता बनाए रखने में भी सहायक होता है।
विशेषज्ञों के अनुसार, मोबाइल के बढ़ते उपयोग के कारण बच्चों में ध्यान भंग (डिस्ट्रैक्शन) की समस्या बढ़ रही है। ऐसे में संगीत सीखना बच्चों को अनुशासन, धैर्य और निरंतर अभ्यास की आदत सिखाता है, जिससे उनकी ध्यान शक्ति में उल्लेखनीय सुधार होता है। नियमित रूप से वाद्य यंत्र बजाने या गायन का अभ्यास करने से बच्चों की फोकस करने की क्षमता मजबूत होती है और वे पढ़ाई में भी बेहतर प्रदर्शन करने लगते हैं।
इसी दिशा में 'अरिंदम संगीत एवं कला' संस्थान पटेल नगर वार्ड नं. १६ शहडोल एमपी द्वारा बच्चों को संगीत और कला का व्यवस्थित प्रशिक्षण प्रदान किया जा रहा है। यहां तबला, हारमोनियम, गिटार, कांगो, सिंथेसाइजर, ढोलक, काहोन, बाँसुरी जैसे वाद्य यंत्रों के साथ-साथ पेंटिंग की कक्षाएं भी संचालित की जा रही हैं। इन कक्षाओं में बच्चे बढ़-चढ़कर भाग ले रहे हैं और अपनी प्रतिभा को निखारते हुए आत्मविश्वास में वृद्धि कर रहे हैं।
संस्थान के प्रशिक्षक अनिल विश्वकर्मा एवम् कौस्तुभ अनिल कुमार के मार्गदर्शन में बच्चों को न केवल तकनीकी ज्ञान दिया जा रहा है, बल्कि उन्हें गहरी समझ और लगाव भी विकसित कराया जा रहा है। उनके अनुसार, 'संगीत, आर्ट एवं क्राफ्ट बच्चों के अंदर छिपी प्रतिभा को बाहर लाने का एक सशक्त माध्यम है। यह उन्हें अनुशासित, आत्मनिर्भर और मानसिक रूप से मजबूत बनाता है। '
अभिभावकों का भी कहना है कि संगीत,आर्ट एवं क्राफ्ट सीखने के बाद उनके बच्चों के व्यवहार में सकारात्मक बदलाव देखने को मिला है। वे पहले से अधिक शांत, केंद्रित और आत्मविश्वासी बन गए हैं। कुल मिलाकर, यह कहा जा सकता है कि आज के समय में बच्चों के लिए केवल एक शौक नहीं, बल्कि उनके उज्जवल भविष्य की एक मजबूत नींव है।