Rewa News: रीवा में करोड़ों की प्रॉपर्टी, लाखों में पंजीयन; सरकार को हो रही राजस्व की बड़ी हानि

1 अप्रैल से बढ़ने वाली गाइडलाइन दरों से बचने के लिए तेज हुई रजिस्ट्री, असली कीमत छुपाकर हो रहा अवैध नगद लेनदेन

 

रीवा। मार्च माह में शहर में प्रॉपर्टी की खरीद-बिक्री अपने चरम पर है। इसकी मुख्य वजह आगामी 1 अप्रैल से लागू होने वाली नई गाइडलाइन दरें हैं, जिनमें मध्य प्रदेश सरकार द्वारा जमीन और प्रॉपर्टी के दाम बढ़ाए जाने की तैयारी है। इसी बढ़ोत्तरी से बचने के लिए लोग वित्तीय वर्ष के अंतिम महीने में तेजी से रजिस्ट्री करा रहे हैं।


लेकिन इस तेजी के बीच एक बड़ा खेल भी सामने आ रहा है। शहर में कमर्शियल प्रॉपर्टी की रजिस्ट्री वास्तविक कीमत से पांच से छह गुना कम पर कराई जा रही है। उदाहरण के तौर पर, यदि किसी प्रॉपर्टी की वास्तविक कीमत 2 करोड़ रुपए है, तो उसकी रजिस्ट्री मात्र 30 से 40 लाख रुपए में कराई जा रही है। जबकि शेष रकम बिल्डर या विक्रेता द्वारा नकद में ली जा रही है। यह पूरा मामला अब सरकारी तंत्र के संज्ञान में आ चुका है, जिसके बाद जांच एजेंसियां सक्रिय हो गई हैं।


रजिस्ट्री में कम कीमत, बाकी कैश में
सूत्रों के अनुसार, कर विभागों का खुफिया तंत्र अब इस तरह के मामलों पर पैनी नजर रख रहा है। बिल्डरों के दफ्तरों के आसपास आने-जाने वाले लोगों की गतिविधियों को रिकॉर्ड किया जा रहा है। इतना ही नहीं, पंजीयन कार्यालयों के बाहर भी नजर रखी जा रही है, जहां अक्सर खरीददार नकद भुगतान करते पाए जाते हैं।

सरकारी सिस्टम ने रीवा शहर में ऐसे कई स्थान चिन्हित किए हैं, जहां नियमित रूप से संदिग्ध लेनदेन हो रहा है। इनमें सिरमौर चौक, नया बस स्टैंड क्षेत्र और शिल्पी प्लाजा प्रमुख हैं। यहां कई बिल्डर अपने कार्यालयों के साथ-साथ गोल्ड शोरूम के जरिए भी लेनदेन को अंजाम दे रहे हैं। बताया जा रहा है कि इन स्थानों पर रोजाना करोड़ों रुपए का अवैध नकद लेनदेन हो रहा है, जिससे शासन को भारी राजस्व हानि हो रही है।


ऐसे हो रहा है खेल

  • -प्रॉपर्टी की वास्तविक कीमत तय होती है करोड़ों में।
  • -रजिस्ट्री कराई जाती है गाइडलाइन या उससे भी कम दर पर।
  • -शेष राशि नकद में ली जाती है।
  • -टैक्स और स्टांप ड्यूटी से बचने का प्रयास।
  • -शासन को करोड़ों रुपए का नुकसान।

पूरे नेटवर्क पर शिकंजा
सूत्रों की मानें तो सरकार अब इस पूरे नेटवर्क पर शिकंजा कसने की तैयारी में है। खुफिया विभाग के लोग सादे कपड़ों में निगरानी कर रहे हैं और संदिग्ध गतिविधियों की रिपोर्ट तैयार की जा रही है।


संभावना जताई जा रही है कि आने वाले दिनों में इस मामले में बड़ी कार्रवाई हो सकती है। जिन बिल्डरों के खिलाफ सबूत मिलेंगे, उन पर न केवल आर्थिक कार्रवाई होगी, बल्कि कानूनी शिकंजा भी कसा जा सकता है। प्रॉपर्टी बाजार में इस हलचल के बीच यह स्पष्ट है कि शासन अब राजस्व हानि को लेकर गंभीर हो चुका है और किसी भी तरह की अनियमितता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है।