Rewa News: रीवा में 'मिनी चित्रकूट'; शिक्षक की तपस्या से जन्मा, संरक्षण की दरकार

सपने में आए थे देवरहा बाबा, निर्जन पहाड़ी बनी तीर्थस्थल 

 

रीवा। गुढ़ तहसील के दुआरी गांव की एक निर्जन पहाड़ी कभी सूनी और उपेक्षित भूमि थी। आज यह स्थान दुर्मनकूट के नाम से जाना जाता है। एक ऐसा भ्राम जिसकी पवित्र आभा, प्राकृतिक सौंदर्य और आध्यात्मिक शांति इसे मिनी चित्रकूट का स्वरूप देती है। लेकिन यह चमत्कार अब उपेक्षा से जूझ रहा है और उजड़ने की कगार पर पहुंच चुका है। यह स्थल किसी सरकारी अनुदान या बजट से नहीं बल्कि एक शिक्षक की तपस्या और समर्पण से बना। 


बताया जाता है कि वर्ष 1980 में दुआरी गांव के लवकुश अग्निहोत्री को देवरहा बाबा सपने में आए जिन्होंने यहां पर तपस्या की थी और कहा कि दुर्मनकूट में कुछ अच्छा करो और फिर विलीन हो गए।

सुबह होते ही उन्होंने यह सपना गांव वालों को बताया और गांव वालों के सहयोग से दुर्मनकूट का -विकास किया। लेकिन वास्तविक निर्माण उन्होंने अपने वेतन से किया। धीरे-धीरे यह सूनी पहाड़ी एक जीवंत आध्यात्मिक धाम में बदल गई। 


रख-रखाव के अभाव में यह धाम बिखर रहा है। मार्ग टूट चुके हैं, मंदिरों की रंगाई-पुताई उखड़ रही है, प्राकृतिक गुफाओं और झरनों की सफाई नहीं हो रही। प्रकाश व्यवस्था और सुरक्षा व्यवस्था पूरी तरह उपेक्षित है। 


ये हैं स्थानीय लोगों की प्रमुख मांगें 

  1. दुर्मनकूट को धार्मिक पर्यटन स्थल घोषित किया जाए। 
  2. पहाड़ी मार्गों का विकास, सुरक्षा, प्रकाश व्यवस्था सुनिश्चित की जाए। 
  3. मंदिरों का पुनरुद्धार और वृक्ष संरक्षण किया जाए। 
  4. पूरे 17 एकड़ क्षेत्र को आस्था वन के रूप में संरक्षित किया जाए। 
  5. देवरहा बाबा की स्मृति में ध्यान. केंद्र स्थापित हो। 
  6. पर्यटन, वन विभाग और जिला प्रशासन इसके संरक्षण की जिम्मेदारी ले। 

दुर्मनकूट में यह है खास
17 एकड़ शासकीय पहाड़ी में फैला सम्पूर्ण धाम, लगभग 25 भव्य मंदिर, 21 फीट ऊंची हनुमानजी की विशाल प्रतिमा, भगवान शंकर, पार्वती, राम दरबार, लक्ष्मण पहाड़ी, सीता रसोइया, सती अनसूइया आश्रम, जानकी कुंड, गुप्त गोदावरी और प्राकृतिक हनुमान धारा भी है। 


इनका कहना है-
दुर्मनकूट को मिनी चित्रकूट बनाने की जिम्मेदारी पं.स्व. लवकुश अग्निहोत्री ने उठाई। उन्होंने जीवन की पूरी कमाई इस तपोस्थली को संवारने में लगा दी। आज यह स्थान रखरखाव के अभाव में बिखरने लगा है। 
-डॉ. बीके शुक्ल दुर्मनकूट धाम समिति 

दुर्मनकूट धाम केवल धार्मिक आस्था का प्रतीक नहीं बल्कि एक शिक्षक की अदम्य निष्ठा का जीवंत उदाहरण है। अब समय आ गया है कि सरकार प्रशासन और समाज मिलकर इस धरोहर को बचाएं। ताकि दुर्मनकूट आने वाली पीढ़ियों के लिए विंध्यका दूसरा चित्रकूट बनकर जीवित रहे।
-रामायण अग्निहोत्री ग्रामवासी 

मेरे स्वर्गीय पिता ने अपने जीवन के अनमोल वर्ष इस स्थल को बनाने में लगाए। उनके जाने के बाद उचित देखरेख न हो पाने से यह स्थल उजड़ने के कगार पर है। हम चाहते हैं कि शासन इसे अपने हाथ में लेकर पर्यटन स्थल के रूप में विकसित करें। 
-योगेश अग्निहोत्री, संरक्षक दुर्मनकूट धाम समिति 


दुर्मनकूट आज आसपास के लोगों के लिए आस्था का केंद्र बन चुका है। पूरा क्षेत्र चाहता है कि इसे धार्मिक और पर्यटन स्थल घोषित कर इसका समुचित विकास किया जाए। 
-विनोद पांडेय, सदस्य दुर्मनकूट धाम समिति