Shahdol News: शहडोल के पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय में जम्मू-कश्मीर पर दो दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का हुआ शुभारंभ

 जब तक सच सामने नहीं आएगा, तब तक कश्मीर के बारे में हमारी समझ अधूरी ही रहेगी: प्रो. रामशंकर

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शहडोल। पंडित शंभूनाथ शुक्ला विश्वविद्यालय में जम्मू कश्मीर निरंतरता और परिवर्तन विषय पर आयोजित दो-दिवसीय अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन का शुभारंभ किया गया। शुभारंभ सम्मेलन को सम्बोंधित करते हुए विशिष्ट अतिथि रामलाल रौतेल, अध्यक्ष मध्यप्रदेश कोल जनजातीय विकास प्राधिकरण ने कश्मीर और आपरेशन सिंदूर की विस्तार से चर्चा की। 


उन्होंने कहा कि जम्मू-कश्मीर की सभ्यता, दर्शन, संस्कृति और बौद्धिक परंपरा हजारों वर्षों से भारत की मूल आत्मा के साथ जुड़ी हुई है। कश्मीर शैव दर्शन, संस्कृत विद्या, नाट्यदृसंगीत, खगोलदृगणित और आध्यात्मिक साधना का अद्वितीय केंद्र रहा है।


कार्यक्रम की अध्यक्षता कर रहे विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो रामशंकर ने अपने वक्तव्य में सभी आगंतुकों का आत्मीय अभिनंदन करते हुए कहा कि कश्मीर सम्बन्धी विमर्श में अनेक ऐतिहासिक तथ्य, जनसांख्यिकीय बदलावों, नीतिगत त्रुटियों और बाहरी हस्तक्षेपों के बारे में वास्तविक बातें सामान्य जनता तक नहीं पहुँचने दी गईं। 


उन्होंने कहा कि 'जब तक सच को सामने नहीं लाया जाएगा, तब तक कश्मीर के बारे में हमारी समझ अधूरी ही रहेगी। 'उन्होंने कहा कि हमारा विश्वविद्यालय कश्मीर की समस्या और परिवर्तन में शोध को बढ़ावा दे रहा है और इसे निरंतरता प्रदान करने के लिए भविष्य में रचनात्मक प्रयास किए जाएंगे।


उन्होंने यह भी कहा कि अनुच्छेद 370 के बाद कश्मीर नए अवसरों, पारदर्शिता और वास्तविक विकास के दौर में प्रवेश कर चुका है। अत: अब कश्मीर को अतीत की व्याख्याओं में नहीं, बल्कि नए यथार्थ के संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।


सम्मेलन कार्यक्रम को सम्बोंधित करते हुए डॉ. पूर्णिमा शर्मा ने कहा कि जम्मू कश्मीर में निरंतरता और परिवर्तन की जटिल परतों को समझना आज के समय की एक प्रमुख शैक्षणिक आवश्यकता है।

संयुक्त संयोजक विजय पांडे ने अपने उद्वोधन में कश्मीर की चर्चा की और वहां की वर्तमान समस्या पर अभिनव पहल इस सम्मेलन को बताया। इस अवसर पर राष्ट्रीय स्तर के विद्वानों, विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों और विश्वविद्यालय समुदाय की उपस्थिति रही।