MP News: एमपी के 880 स्कूलों में एक भी टीचर नहीं, एक-एक शिक्षक के भरोसे चल रहे पौने सात हजार विद्यालय
सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ा रहे सरकारी दावे, शिक्षकों के 79 हजार पद खाली
भोपाल। मध्य प्रदेश में स्कूली शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के तमाम दावे किए जा रहे हैं, लेकिन हकीकत में सारे दावे सिर्फ कागजों की शोभा बढ़ा रहे हैं। मध्य प्रदेश में 880 स्कूल ऐसे हैं, जिनमें एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 6848 स्कूलों में महज एक-एक शिक्षक से काम चलाया जा रहा है। पढ़ाई का हाल या होगा, यह इंतजाम करने वाले ज्यादा जानते होंगे। दूसरी तरफ एसआईआर के सर्वे में बीएलओ के रूप में पंद्रह हजार से अधिक शिक्षकों की ड्यूटी लगा दी गई है।
दसवीं-बारहवीं की परीक्षाएं भी सात फरवरी से शुरू होना है। ऐसे में बच्चों की पढ़ाई पर बड़ा संकट खड़ा हो गया है। मध्य प्रदेश में शिक्षा व्यवस्था को और बेहतर बनाने के लिए राज्य सरकार ने सांदीपनि (सीएम राइज) स्कूलों की शुरुआत की है। यह स्कूल सुविधाओं से युत हैं। इन स्कूलों में बच्चों को आने-जाने के लिए नि:शुल्क बस सुविधा भी उपलब्ध है, लेकिन दूसरी तरफ के हालात उलट हैं।
तकरीबन 55 जिलों के 880 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 6848 स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे किसी तरह से चलाए जा रहे हैं। प्रदेश में माध्यमिक और प्राथमिक शिक्षकों के करीब 79 हजार पद खाली हैं।
हालांकि इनमें कुछ पदों पर भर्ती हुई है, लेकिन खाली पदों की तुलना में इनकी संख्या बहुत कम है। इसका सीधा असर प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पर पड़ रहा है। इसके इतर, शहरों के स्कूलों में शिक्षकों की भरमार है और गांवों में टोटा है। इसी वजह से गांवों में शिक्षा व्यवस्था प्रभावित हो रही है।
प्रदेश की शिक्षा व्यवस्था पूरी तरह से चौपट हो चुकी
शासकीय शिक्षक संघ के कार्यकारी अध्यक्ष उपेंद्र कौशल कहते हैं कि पूरी शिक्षण व्यवस्था प्रदेश में चौपट है। सरकारी शिक्षक ऑफिस के चक्कर लगा रहे हैं, बच्चों की पढ़ाई चौपट होती जा रही है। अब शिक्षकों की ड्यूटी बीएलओ में लगा दी है।
कई स्कूलों में एक-एक शिक्षक हैं, कई स्कूल में दो शिक्षक हैं। सरकार को तत्काल इस तरफ ध्यान देकर विद्यार्थियों की पढ़ाई के संबंध में सोचना चाहिए, ताकि बच्चों को भविष्य बेहतर बन सके।
भोपाल में 42 स्कूल एक एक शिक्षक के भरोसे
तकरीबन प्रत्येक शिक्षक अपनी पदस्थापना शहर के स्कूलों में कराने की जुगाड़ में लगे रहते हैं। यही कारण है कि शहरों के स्कूलों में जरूरत से ज्यादा शिक्षक हैं। प्रदेश में कुल शिक्षकों की संख्या 382869 है। इसमें अतिथि शिक्षक भी शामिल हैं। स्कूल शिक्षा विभाग के आंकड़े बताते हैं कि धार में 12289 पदस्थ हैं।
बावजूद इसके धार जिले में 64 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं है, जबकि 402 स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे हैं। जिले में कुल स्कूलों की संख्या 3443 है। भोपाल जिले में कुल शिक्षक 5676 हैं। बावजूद इसके 7 स्कूलों में एक भी शिक्षक नहीं हैं, जबकि 42 स्कूल एक-एक शिक्षक के भरोसे हैं। इसी तरह इंदौर में 53 स्कूलों सिंगल टीचर हैं।